मैं राह देखती खड़ी द्वार ------------------------------------ मैं राह देखती खड़ी द्वार, प्रियतम आ जाओ एक बार... सुन लो दिल की करुण पुकार, कब होगा तेरा दीदार। कब होंगी फिर आँखें चार, जरा बताना मुझको यार। मैं राह देखती खड़ी द्वार, प्रियतम आ जाओ एक बार... अंखियां दुखती पंथ निहार, अश्रु निकलते बारम्बार। निशि-वासर मैं करूं इंतजार, तन्हाई डालेगी मार। मैं राह देखती खड़ी द्वार, प्रियतम आ जाओ एक बार... तुम बिन फीके सब त्योहार, रूखा लगता है आहार। तुम्हें बुलाए मेरा प्यार, पहना दे बांहों का हार। मैं राह देखती खड़ी द्वार, प्रियतम आ जाओ एक बार... ------------------------------------ 🌷मनोज कुमार अनमोल🌷