उछल रहा डाली पर बन्दर
उछल रहा डाली पर बन्दर ---------------------------------- उछल रहा डाली पर बन्दर, डाली टूटी गिरा समन्दर। घुस गया पानी मुँह के अन्दर, चोट लगी उसको भयंकर। बेड पर लेटा देखें अम्बर, दु:खी हुआ उसका कलंदर। ------------------------------------ मनोज कुमार अनमोल