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भारत माँ का सच्चा है वहीं सपूत

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भारत माँ का सच्चा है वहीं सपूत ---------------------------------------------- भारत माँ का सच्चा है वहीं सपूत, पर पीड़ा देखकर जो हो द्रवीभूत। नेक दिल का हो और इरादे हो मजबूत, जो ना माने ऊँच-नीच और छुआ-छूत। ---------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

आप सभी को सुप्रभात

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आप सभी को सुप्रभात,  ------------------------------------------------ दोस्तों आप सभी को सुप्रभात,  कैसे बीती थी आपकी रात?  क्या नींद खुल गई थी अकस्मात्? चलो प्रभु नाम से करें दिन की शुरुआत। ------------------------------------------------ मनोज कुमार अनमोल

अपने चाँद से चेहरे पर रखा करो सदा नक़ाब

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अपने चाँद से चेहरे पर रखा करो सदा नक़ाब ----------------------------------------------- अपने चाँद से चेहरे पर रखा करो सदा नक़ाब, डर लगता है कोई चुरा ना ले मुझसे तुम्हें देकर गुलाब। ----------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल 

महसूस नहीं होती सफ़र की थकान

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महसूस नहीं होती सफ़र की थकान ------------------------------------------------- महसूस नहीं होती सफ़र की थकान, जब बगल में बैठी हो आपकी जान। जब सुर्ख़ होंठों से बिखेरती है वो मुस्कान, तो मुश्किल सफ़र भी हो जाता है आसान। -------------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

शिव स्तुति

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शिव स्तुति ------------------------------------------ भोले शंकर ओ त्रिशूल धारी,  आपको पूजे सब नर-नारी। जिनके गले में नागों का हार,  बोलो शंकर की जय-जय कार। बोलो भगवन की जय-जय कार ... आत्मज हैं जिनके गणपति,  पार्वती के जो हैं पति। वृष वाहन पर जो है सवार,  बोलो शंकर की जय-जय कार।  बोलो भगवन की जय-जय कार... कैलाश पर है जिनका दरबार,  सिर से निकली गंगा जी की धार।  बाजे डमरू की डंकार, बोलो शंकर की जय-जय कार। बोलो भगवन की जय-जय कार... महादेव, नीलकंठ उपनाम धारी,  स्तुति करते सब नर-नारी। भक्तों का करते उद्धार,  बोलो शंकर की जय-जय कार। बोलो भगवन की जय-जय कार... --------------------------------------------  मनोज कुमार अनमोल    रतापुर, रायबरेली

हिन्दी हमारी मातृभाषा

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हिन्दी हमारी मातृभाषा  ----------------------------------- हिंदी हमारी मातृभाषा,  हिंदी हमारी शान है। इसकी बदौलत विश्व में,  अपनी अलग पहचान है। पांच उपभाषाएं हैं जिसकी, अट्ठारह है बोलियां। बावन वर्णों से सजी है,  स्वर-व्यंजनों की टोलियां। लिपि है जिसकी देवनागरी,  देव भाषा का अनुवाद है। है अनेकों इसकी विधाएं,  जन पढ़ लेते स्वाद है।  हिंदी हमारी मातृभाषा,  हिंदी हमारी शान है। इसकी बदौलत विश्व में,  अपनी अलग पहचान है।। आओ दृढ़ संकल्प कर लें, हम सदा ही बोलेंगे।  जो बोलते विदेशी भाषा,  उनके नेत्र खोलेंगे।  सहज सरल है अपनी भाषा,  रस की तो ये खान है। हम सब भारतीयों को,  निज भाषा पर अभिमान है। हिंदी हमारी मातृभाषा,  हिंदी हमारी शान है।  इसकी बदौलत विश्व में,  अपनी अलग पहचान है। --------------------------------- मनोज कुमार अनमोल 

गुरु आए जीवन में बनकर दिनकर

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गुरु आए जीवन में बनकर दिनकर ------------------------------------------ अज्ञानता के तिमिर को हरकर, गुरु आए जीवन में बनकर दिनकर। ज्ञान पोटली लाएं भर-भरकर, शिष्यों को फिर बांटा जमकर। गुरु तो ज्ञान के है रत्नाकर, कुन्दन बनाया हमें तपाकर। ------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल