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लिखी है मैंने पहली किताब

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लिखी है मैंने पहली किताब ------------------------------------------ लिखी है मैंने पहली किताब,  Like, Comment कर दो साब... अच्छी लगी या आपको खराब, Please देना जरूर जवाब... ------------------------------------------  मनोज कुमार अनमोल

हे दिलरुबा तू है कितनी हसीन

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है दिलरुबा तू है कितनी हसीन ------------------------------------------ हे दिलरुबा तू है कितनी हसीन, तू जन्नत की परी है या क्वीन। लोग कहते है कि तू है बड़ी शालीन, मेरे पास तू है मुझे न होता यक़ीन। ------------------------------------------ मनोज कुमार अनमोल

मेरी ज़िन्दगी है खुली किताब

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मेरी ज़िन्दगी है खुली किताब  ---------------------------------------- मेरी ज़िन्दगी है खुली किताब, जिसको पढ़ना है पढ़ लो साब।  हमने देखे थे क्या-क्या ख़्वाब? पर सब चकनाचूर हो गए जनाब। ---------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

प्यारा भारत देश हमारा

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प्यारा भारत देश हमारा -------------------------------------------- सबसे सुंदर सबसे न्यारा, प्यारा भारत देश हमारा। दिक् उत्तर में तुंग हिमालय, अरि से रक्षा करता है। फौलादी अपना सीना ताने, प्रतिपल वारों को सहता है। दक्षिण में हिंद महासागर, लहरा-लहरा कर बहता है। आसमान में नीरद बनकर, भू पर वर्षा करता है। यह राम, कृष्ण, गौतम की धरती, जहाँ गंगा, यमुना कल-कल बहती। विभिन्न तरह की यहाँ फसले उगती, जो जन-जन के उदरों को भरती। प्रेम, उदारता, दया भावना, यहाँ लोगों के दिल में बसती। ईर्ष्या, द्वेष, झूठ, कपट से, सदा आत्मा जिनकी डरती। यहाँ भिन्न-भिन्न है भाषा बोली, भिन्न-भिन्न है जाति, धर्म। इसके वासी भोले-भाले, जो करते हैं सत्कर्म। आओ देश का हम मान बढ़ाएं विश्व में इसको उच्च उठाएं। प्रेम से इसको शीश झुकाए, एक साथ सब मिलकर गाएं। सबसे सुंदर सबसे न्यारा, प्यारा भारत देश हमारा। --------------------------------------------       मनोज कुमार अनमोल

कमल

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कमल -------------------------------------- देखो राष्ट्रीय पुष्प कमल, सुंदर, कोमल इसके दल। पोखर है इसका आवास, इस पर लक्ष्मी जी का वास। भानु रश्मियां जब हैं पड़ती, कोमल पंखुड़ियाँ तब हैं खुलती। पवित्र, पुष्पराज है ये सुमन, जो मोहित करता सबका मन। ---------------------------------------- 🌟मनोज कुमार अनमोल🌟

कैसी लगी मेरी किताब?

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कैसी लगी मेरी किताब  ------------------------------ मैं जानने को हूँ बेताब,  कैसी लगी मेरी किताब? प्लीज़ देना जरूर ज़वाब। खराब है या लाज़वाब। ------------------------------ मनोज कुमार अनमोल 

कहाँ गई गौरैया प्यारी?

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कहाँ गई गौरैया प्यारी? -------------------------------------- कहाँ गई गौरैया प्यारी? अब ना दिखती है बेचारी।  सूना आँगन सूनी अटारी,  बाग-बगीचे और फुलवारी।  ध्वनि थी जिसकी एकदम न्यारी,  चुगने आती बारी-बारी।  थी नन्हीं वह जीव धारी,   संकटग्रस्त हुई बेचारी।  आओ बने हम मंगलकारी,  यह संदेश जनहित में जारी। -----------------------------------------  🌟मनोज कुमार अनमोल🌟