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गुरु आए जीवन में बनकर दिनकर

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गुरु आए जीवन में बनकर दिनकर ------------------------------------------ अज्ञानता के तिमिर को हरकर, गुरु आए जीवन में बनकर दिनकर। ज्ञान पोटली लाएं भर-भरकर, शिष्यों को फिर बांटा जमकर। गुरु तो ज्ञान के है रत्नाकर, कुन्दन बनाया हमें तपाकर। ------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

हिन्दी हमारी मातृभाषा

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हिन्दी हमारी मातृभाषा  ----------------------------------- हिंदी हमारी मातृभाषा,  हिंदी हमारी शान है। इसकी बदौलत विश्व में,  अपनी अलग पहचान है। पांच उपभाषाएं हैं जिसकी, अट्ठारह है बोलियां। बावन वर्णों से सजी है,  स्वर-व्यंजनों की टोलियां। लिपि है जिसकी देवनागरी,  देव भाषा का अनुवाद है। है अनेकों इसकी विधाएं,  जन पढ़ लेते स्वाद है।  हिंदी हमारी मातृभाषा,  हिंदी हमारी शान है। इसकी बदौलत विश्व में,  अपनी अलग पहचान है।। आओ दृढ़ संकल्प कर लें, हम सदा ही बोलेंगे।  जो बोलते विदेशी भाषा,  उनके नेत्र खोलेंगे।  सहज सरल है अपनी भाषा,  रस की तो ये खान है। हम सब भारतीयों को,  निज भाषा पर अभिमान है। हिंदी हमारी मातृभाषा,  हिंदी हमारी शान है।  इसकी बदौलत विश्व में,  अपनी अलग पहचान है। --------------------------------- मनोज कुमार अनमोल 

क्यों होती है लोगों को मुझसे जलन?

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क्यों होती है लोगों को मुझसे जलन? ------------------------------------------- क्यों होती है लोगों को मुझसे जलन? ना कहे हैं मैंने किसी को दुर्वचन। ना है किसी से मेरी अनबन,  मैं सदा रहता हूँ अपने में मगन। ---------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

मैं नारी हूँ

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     मैं नारी हूँ  -×-×-×-×-×-×-×-×-×-×-×-×- मैं वसुधा की नारी हूँ,  जन-जन मंगलकारी हूँ ..... मैं फूलों की क्यारी हूँ,  बच्चों की किलकारी हूँ।  गृहिणी, भगिनी, महतारी हूँ,  घर-घर की उजियारी हूँ।  मैं वसुधा की नारी हूँ,  जन-जन मंगलकारी हूँ .....  मैं प्रियतम की प्यारी हूँ,   प्रेम की पिचकारी हूँ।  कृति ब्रह्मा की न्यारी हूँ,  श्रद्धा की अधिकारी हूँ।  मैं वसुधा की नारी हूँ,  जन-जन मंगलकारी हूँ .....  मैं दुर्गा की अवतारी हूँ,   मैं सिंह गर्जना कारी हूँ। दुष्टों  पर मैं भारी हूूँ,   विघ्नों से ना हारी हूूँ।  मैं वसुधा की नारी हूँ,  जन-जन मंगलकारी हूँ .....  मैं अबला, ना बेचारी हूँ,  नर से भारी नारी हूँ।  भारत मां की दुलारी हूँ,   मैं सबकी हितकारी हूँ।  मैं वसुधा की नारी हूँ,  जन-जन मंगलकारी हूँ .....  -×-×-×-×-×-×-×-×-×-×--×-   मनोज कुमार अनमोल       रतापुर, रायबरेली          उत्...

जन्मदिन मुबारक हो भाई जान

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जन्मदिन मुबारक हो भाई जान ----------------------------------------------------- हर पल ओठों पर रहे मुस्कान, पूरे हो आपके सभी अरमान। हर जगह मिले आपको सम्मान, इसी दुआ के साथ जन्मदिन मुबारक हो भाई जान। ----------------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

प्रकृति सुषमा

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प्रकृति सुषमा  ----------------------------------------------------- प्रकृति की सुषमा अपार,  मन को हरती बार-बार।  जिधर भी दृष्टि जाती,  प्रकृति अपना सौन्दर्य दिखाती।  इस प्रकृति में खोकर कवि जन,  करते हैं नित नूतन वर्णन।  प्रात: होते ही दिनकर,  फैलाता है अपने रश्मि रूपी कर।  तृण पर पड़ी ओस की मुक्ता सी बूँदे, कलरव करते तरु नीड से पक्षी कूदे। पोखरों में सोता हुआ कमल,  खोलता है अपने पंखुड़ी रूपी नयन। कुछ तरुओं पर खग का कूजन, कुछ खग उड़ते मुक्त गगन। तरुओं और लताओं का मिलन,  अरण्यों में पशु करते विचरण।  प्रातः बहती त्रिविध पवन, छू लेती हर जन का मन।  आगन्तुक कुसुमों की सुगंध,  जब बहती है मन्द-मन्द। पराग पान हेतु लोभी भ्रमर,   तब पुष्पों पर करता विचरण।  झरनों का पर्वत से गिरना,  नदियों का कल-कल बहना।  चंचल तितली का पुष्पों पर उड़ना, इस प्रकृति की सुंदरता का क्या कहना। मैं अवलोक रहा हूँ बार-बार,  इस प्रकृति का रूप और श्रृंगार। पर मैं इस प्रकृति का कितना करूं बखान, क्योंकि यह प्रकृति है सौन्दर्य ...

आओ पेश करें हम मेहनत की मिसाल

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आओ पेश करें हम मेहनत की मिसाल ----------------------------------------------- आओ पेश करें हम मेहनत की मिसाल, प्रगति से मिलाएं अपने कदमताल। आज का काम कल पर मत टाल। सफलता न आए उसकी क्या मजाल? ---------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल