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तारो मेरे प्रभु घनश्याम

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 तारो मेरे प्रभु घनश्याम ------------------------------------------ अब ना रहीं हसरतें तमाम, ज़िन्दगी की सुबह गई आई शाम। चहुँओर जीवन में मचा है कोहराम, अब तो तारो मेरे प्रभु घनश्याम। ------------------------------------------ मनोज कुमार अनमोल 

हे प्रभु!

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हे प्रभु! ------------------------------------------ हे प्रभु! मैं आपके कितने हूँ करीब, फिर भी मैं कितना हूँ बदनसीब? कब बदलेगा प्रभु मेरा नसीब? आप ही बताओ कोई तरक़ीब। ------------------------------------------ मनोज कुमार अनमोल