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Showing posts with the label कविता

हिन्दी हमारी मातृभाषा

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हिन्दी हमारी मातृभाषा  ----------------------------------- हिंदी हमारी मातृभाषा,  हिंदी हमारी शान है। इसकी बदौलत विश्व में,  अपनी अलग पहचान है। पांच उपभाषाएं हैं जिसकी, अट्ठारह है बोलियां। बावन वर्णों से सजी है,  स्वर-व्यंजनों की टोलियां। लिपि है जिसकी देवनागरी,  देव भाषा का अनुवाद है। है अनेकों इसकी विधाएं,  जन पढ़ लेते स्वाद है।  हिंदी हमारी मातृभाषा,  हिंदी हमारी शान है। इसकी बदौलत विश्व में,  अपनी अलग पहचान है।। आओ दृढ़ संकल्प कर लें, हम सदा ही बोलेंगे।  जो बोलते विदेशी भाषा,  उनके नेत्र खोलेंगे।  सहज सरल है अपनी भाषा,  रस की तो ये खान है। हम सब भारतीयों को,  निज भाषा पर अभिमान है। हिंदी हमारी मातृभाषा,  हिंदी हमारी शान है।  इसकी बदौलत विश्व में,  अपनी अलग पहचान है। --------------------------------- मनोज कुमार अनमोल 

गुरु आए जीवन में बनकर दिनकर

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गुरु आए जीवन में बनकर दिनकर ------------------------------------------ अज्ञानता के तिमिर को हरकर, गुरु आए जीवन में बनकर दिनकर। ज्ञान पोटली लाएं भर-भरकर, शिष्यों को फिर बांटा जमकर। गुरु तो ज्ञान के है रत्नाकर, कुन्दन बनाया हमें तपाकर। ------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

प्रकृति सुषमा

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प्रकृति सुषमा  ----------------------------------------------------- प्रकृति की सुषमा अपार,  मन को हरती बार-बार।  जिधर भी दृष्टि जाती,  प्रकृति अपना सौन्दर्य दिखाती।  इस प्रकृति में खोकर कवि जन,  करते हैं नित नूतन वर्णन।  प्रात: होते ही दिनकर,  फैलाता है अपने रश्मि रूपी कर।  तृण पर पड़ी ओस की मुक्ता सी बूँदे, कलरव करते तरु नीड से पक्षी कूदे। पोखरों में सोता हुआ कमल,  खोलता है अपने पंखुड़ी रूपी नयन। कुछ तरुओं पर खग का कूजन, कुछ खग उड़ते मुक्त गगन। तरुओं और लताओं का मिलन,  अरण्यों में पशु करते विचरण।  प्रातः बहती त्रिविध पवन, छू लेती हर जन का मन।  आगन्तुक कुसुमों की सुगंध,  जब बहती है मन्द-मन्द। पराग पान हेतु लोभी भ्रमर,   तब पुष्पों पर करता विचरण।  झरनों का पर्वत से गिरना,  नदियों का कल-कल बहना।  चंचल तितली का पुष्पों पर उड़ना, इस प्रकृति की सुंदरता का क्या कहना। मैं अवलोक रहा हूँ बार-बार,  इस प्रकृति का रूप और श्रृंगार। पर मैं इस प्रकृति का कितना करूं बखान, क्योंकि यह प्रकृति है सौन्दर्य ...

उठो दोस्तों हो गई भोर

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उठो दोस्तों हो गई भोर ------------------------------- उठो दोस्तों हो गई भोर,  बादल घिर आए घनघोर। नाच रहे हैं देखो मोर, होकर भाव विभोर। जंगल में यह कैसा शोर,  क्या आ गया डायनासोर? ------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

लिखी है मैंने पहली किताब

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लिखी है मैंने पहली किताब ------------------------------------------ लिखी है मैंने पहली किताब,  Like, Comment कर दो साब... अच्छी लगी या आपको खराब, Please देना जरूर जवाब... ------------------------------------------  मनोज कुमार अनमोल

प्यारा भारत देश हमारा

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प्यारा भारत देश हमारा -------------------------------------------- सबसे सुंदर सबसे न्यारा, प्यारा भारत देश हमारा। दिक् उत्तर में तुंग हिमालय, अरि से रक्षा करता है। फौलादी अपना सीना ताने, प्रतिपल वारों को सहता है। दक्षिण में हिंद महासागर, लहरा-लहरा कर बहता है। आसमान में नीरद बनकर, भू पर वर्षा करता है। यह राम, कृष्ण, गौतम की धरती, जहाँ गंगा, यमुना कल-कल बहती। विभिन्न तरह की यहाँ फसले उगती, जो जन-जन के उदरों को भरती। प्रेम, उदारता, दया भावना, यहाँ लोगों के दिल में बसती। ईर्ष्या, द्वेष, झूठ, कपट से, सदा आत्मा जिनकी डरती। यहाँ भिन्न-भिन्न है भाषा बोली, भिन्न-भिन्न है जाति, धर्म। इसके वासी भोले-भाले, जो करते हैं सत्कर्म। आओ देश का हम मान बढ़ाएं विश्व में इसको उच्च उठाएं। प्रेम से इसको शीश झुकाए, एक साथ सब मिलकर गाएं। सबसे सुंदर सबसे न्यारा, प्यारा भारत देश हमारा। --------------------------------------------       मनोज कुमार अनमोल

कैसी लगी मेरी किताब?

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कैसी लगी मेरी किताब  ------------------------------ मैं जानने को हूँ बेताब,  कैसी लगी मेरी किताब? प्लीज़ देना जरूर ज़वाब। खराब है या लाज़वाब। ------------------------------ मनोज कुमार अनमोल 

कहाँ गई गौरैया प्यारी?

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कहाँ गई गौरैया प्यारी? -------------------------------------- कहाँ गई गौरैया प्यारी? अब ना दिखती है बेचारी।  सूना आँगन सूनी अटारी,  बाग-बगीचे और फुलवारी।  ध्वनि थी जिसकी एकदम न्यारी,  चुगने आती बारी-बारी।  थी नन्हीं वह जीव धारी,   संकटग्रस्त हुई बेचारी।  आओ बने हम मंगलकारी,  यह संदेश जनहित में जारी। -----------------------------------------  🌟मनोज कुमार अनमोल🌟 

दुआ है आपको ईश्वर रखें कुशल

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दुआ है आपको ईश्वर रखें कुशल ----------------------------------------------- दुआ है आपको ईश्वर रखें कुशल,  किसी भी कार्य में आप न हो असफल। ख़ुश रहे आपका मन प्रतिपल, बाल न बाँका कर सके रिपु दल। टूटने न पाए आपका मनोबल, निर्बल न हो आपका आत्मबल। ----------------------------------------------- 🌟मनोज कुमार अनमोल 🌟

जल होगा तो होगा कल

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जल होगा तो होगा कल ------------------------------- ये है भू का सत्य अटल, जल होगा तो होगा कल।  हिमगिरि से पिघल-पिघल, नदियों में बहता कल-कल। कितना मृदु कितना शीतल, धरती से निकले उज्ज्वल। ना मिले तो रहे विकल, पान करें तो मिले बल। मत बर्बाद करो भूजल, संग्रह करो इसे भूतल। --------------------------------- ⭐मनोज कुमार अनमोल⭐

सुन्दर है अपनी बहन

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सुन्दर है अपनी बहन ---------------------------- सुन्दर है अपनी बहन, मृग से हैं उसके नयन। मधुर हैं उसके वचन, निर्मल है उसका मन। श्रम में रहती है मगन, कहते हैं ये स्वजन। ---------------------------- 🌷मनोज कुमार अनमोल🌷

उतरा एक धरती पर भगवान

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उतरा एक धरती पर भगवान ------------------------------------------ उतरा एक धरती पर भगवान, करने अपना सब कुछ दान। असहायों का जो है रहमान, हुसैन मंसूरी है जिसकी पहचान। आओ गाएं उसका यशगान, दु:खी चेहरों पर जो लाता मुस्कान। ------------------------------------------ 🌷मनोज कुमार अनमोल🌷

हे रक्त वीर तुमको नमन

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हे रक्त वीर तुमको नमन -------------------------------------------- हे रक्त वीर तुमको नमन, रुधिर दान हेतु ना रुकते चरन। कर्तव्य निर्वहन में आप रहते मगन, देखी है आपमें हमने श्रम की लगन, पीड़ा सबकी हरने की करते जतन, दुवाओं में सदा है आपके अमन। यश गाएं आपका भू और गगन, कोटि नमन भैया Shiv Sharan... --------------------------------------------- 🌟मनोज कुमार अनमोल🌟

लेकर खुशियों की सौगात

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लेकर खुशियों की सौगात ---------------------------------- लेकर खुशियों की सौगात, आयेंगे एक दिन अकस्मात्। ना तुम दुःख करो दिन-रात, ना नयनों से करो बरसात। हमारी ज़रूर होगी मुलाक़ात, विरह से मिलेगी निजात। ---------------------------------- 🌹मनोज कुमार अनमोल🌹

कौन है वो मानवता की मिशाल?

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कौन है वो मानवता की मिशाल? --------------------------------------------------- कौन है वो मानवता की मिशाल? जिनका हृदय है सिंधु सा विशाल। भूखें, नंगे, बेघर और है जो कंगाल, उनकी मदद के लिए दौड़ते तत्काल। अगर आपके ज़ेहन में उठते हैं ये सवाल, तो वो है भाई हुसैन मंसूरी जी परम कृपाल। ---------------------------------------------------- 🌟मनोज कुमार अनमोल🌟

हे जगत् के कृपानिधान

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हे जगत् के कृपानिधान --------------------------------------------- हे जगत् के कृपानिधान, आप सबको दो सद्ज्ञान। दु:खी चेहरो पर लाओ मुस्कान, डगमगाने ना दो किसी का ईमान।  पूरे करो हर जन के अरमान,  सभी को दो रोटी, कपड़ा और मकान। हे प्रभु! हम सब करते आपका ध्यान, दे दो हमें ये वरदान। ---------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल 

मुझे थी जिसकी तलाश

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मुझे थी जिसकी तलाश -------------------------------------------------- मुझे थी जिसकी तलाश... आज गटर में मिली उसकी लाश, सुना था बड़ा हो गया था अय्याश, अपने हाथों से किया अपना विनाश, ख़ामोश है धरती और आकाश, मन मेरा भी है बड़ा हताश, बेवफाई से पहले समझा देती उसे काश... -------------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल 

चाहती है हर औरत

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चाहती है हर औरत --------------------------------------- चाहती है हर औरत... मिले उसे शोहरत, सदा रहे धन-दौलत, हाथ ना फैलाने की आए नौबत, पर ये सम्भव है सिर्फ ...  कर्म या ख़्वाब के बदौलत। --------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल 

मेरा भाई है कितना मासूम

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मेरा भाई है कितना मासूम ------------------------------------------ मेरा भाई है कितना मासूम? क्या आप सभी को है मालूम? आओ उसके संग ले हम सब झूम, मृदु कपोलों को ले चूम।  प्रियवर आओ हमारे रूम ... ------------------------------------------ मनोज कुमार अनमोल 

आज लिखूंगा उस पर गीत...

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आज लिखूंगा उस पर गीत... -------------------------------------------- गुजर गया जो मेरा अतीत, आज लिखूंगा उस पर गीत... कौन-कौन थे मेरे मीत? किससे थी मेरी प्रीत? किससे हारा, किससे जीत? दु:ख के दिन कैसे हुए व्यतीत? कौन कार्य लगते थे पुनीत?  क्या सोच के होता था मन भयभीत? आज लिखूंगा उस पर गीत... --------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल