नसीब में नहीं होता हर किसी के घर
नसीब में नहीं होता हर किसी के घर
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नसीब में नहीं होता हर किसी के घर,
मेरी इस बात को सोचना आप क्षण भर।
बीत जाती है बनाने में इसको उमर,
फिर गूंजते हैं इसमें ख़ुशी के स्वर।
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मनोज कुमार अनमोल
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