ओ मेरे तन के प्रान

ओ मेरे तन के प्रान
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ओ मेरे तन के प्रान, 
तेरे बिना है ज़िन्दगी वीरान। 
छीनकर होंठों की मुस्कान,
कहाँ चले गए श्रीमान्।
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मनोज कुमार अनमोल 

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