कितने यादगार थे वो पल

कितने यादगार थे वो पल
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कितने यादगार थे वो पल,
तुझे देखने को रहते थे विकल।
गुन गुनाते रहते थे ग़ज़ल,
पर इश्क़ हुआ मेरा असफल।
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मनोज कुमार अनमोल 

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