उछल रहा डाली पर बन्दर
उछल रहा डाली पर बन्दर
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उछल रहा डाली पर बन्दर,
डाली टूटी गिरा समन्दर।
घुस गया पानी मुँह के अन्दर,
चोट लगी उसको भयंकर।
बेड पर लेटा देखें अम्बर,
दु:खी हुआ उसका कलंदर।
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मनोज कुमार अनमोल
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