दी है तुम्हें जो पुस्तक उपहार

दी है तुम्हें जो पुस्तक उपहार
------------------------------------------
दी है तुम्हें जो पुस्तक उपहार,
वर्षों की मेहनत है इसमें यार।
करना नहीं है मुझे इसका प्रचार,
मिला था आपसे ये रखना यादगार।
-------------------------------------------
🌟मनोज कुमार अनमोल 🌟

Comments

Popular posts from this blog

मेरे ख़्वाब थे कितने हसीन

मैं सुर, तू संगीत

मेरा भाई है कितना मासूम