कहाँ गई गौरैया प्यारी?

कहाँ गई गौरैया प्यारी?
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कहाँ गई गौरैया प्यारी?
अब ना दिखती है बेचारी। 
सूना आँगन सूनी अटारी, 
बाग-बगीचे और फुलवारी। 
ध्वनि थी जिसकी एकदम न्यारी, 
चुगने आती बारी-बारी। 
थी नन्हीं वह जीव धारी,  
संकटग्रस्त हुई बेचारी। 
आओ बने हम मंगलकारी, 
यह संदेश जनहित में जारी।
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 🌟मनोज कुमार अनमोल🌟 

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