जल होगा तो होगा कल

जल होगा तो होगा कल
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ये है भू का सत्य अटल,
जल होगा तो होगा कल। 
हिमगिरि से पिघल-पिघल,
नदियों में बहता कल-कल।
कितना मृदु कितना शीतल,
धरती से निकले उज्ज्वल।
ना मिले तो रहे विकल,
पान करें तो मिले बल।
मत बर्बाद करो भूजल,
संग्रह करो इसे भूतल।
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⭐मनोज कुमार अनमोल⭐

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