मैं राह देखती खड़ी द्वार
मैं राह देखती खड़ी द्वार
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मैं राह देखती खड़ी द्वार,
प्रियतम आ जाओ एक बार...
सुन लो दिल की करुण पुकार,
कब होगा तेरा दीदार।
कब होंगी फिर आँखें चार,
जरा बताना मुझको यार।
मैं राह देखती खड़ी द्वार,
प्रियतम आ जाओ एक बार...
अंखियां दुखती पंथ निहार,
अश्रु निकलते बारम्बार।
निशि-वासर मैं करूं इंतजार,
तन्हाई डालेगी मार।
मैं राह देखती खड़ी द्वार,
प्रियतम आ जाओ एक बार...
तुम बिन फीके सब त्योहार,
रूखा लगता है आहार।
तुम्हें बुलाए मेरा प्यार,
पहना दे बांहों का हार।
मैं राह देखती खड़ी द्वार,
प्रियतम आ जाओ एक बार...
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🌷मनोज कुमार अनमोल🌷
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