मेरी ज़िन्दगी है खुली किताब

मेरी ज़िन्दगी है खुली किताब 
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मेरी ज़िन्दगी है खुली किताब,
जिसको पढ़ना है पढ़ लो साब। 
हमने देखे थे क्या-क्या ख़्वाब?
पर सब चकनाचूर हो गए जनाब।
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मनोज कुमार अनमोल

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