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शिव स्तुति

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शिव स्तुति ------------------------------------------ भोले शंकर ओ त्रिशूल धारी,  आपको पूजे सब नर-नारी। जिनके गले में नागों का हार,  बोलो शंकर की जय-जय कार। बोलो भगवन की जय-जय कार ... आत्मज हैं जिनके गणपति,  पार्वती के जो हैं पति। वृष वाहन पर जो है सवार,  बोलो शंकर की जय-जय कार।  बोलो भगवन की जय-जय कार... कैलाश पर है जिनका दरबार,  सिर से निकली गंगा जी की धार।  बाजे डमरू की डंकार, बोलो शंकर की जय-जय कार। बोलो भगवन की जय-जय कार... महादेव, नीलकंठ उपनाम धारी,  स्तुति करते सब नर-नारी। भक्तों का करते उद्धार,  बोलो शंकर की जय-जय कार। बोलो भगवन की जय-जय कार... --------------------------------------------  मनोज कुमार अनमोल    रतापुर, रायबरेली

हिन्दी हमारी मातृभाषा

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हिन्दी हमारी मातृभाषा  ----------------------------------- हिंदी हमारी मातृभाषा,  हिंदी हमारी शान है। इसकी बदौलत विश्व में,  अपनी अलग पहचान है। पांच उपभाषाएं हैं जिसकी, अट्ठारह है बोलियां। बावन वर्णों से सजी है,  स्वर-व्यंजनों की टोलियां। लिपि है जिसकी देवनागरी,  देव भाषा का अनुवाद है। है अनेकों इसकी विधाएं,  जन पढ़ लेते स्वाद है।  हिंदी हमारी मातृभाषा,  हिंदी हमारी शान है। इसकी बदौलत विश्व में,  अपनी अलग पहचान है।। आओ दृढ़ संकल्प कर लें, हम सदा ही बोलेंगे।  जो बोलते विदेशी भाषा,  उनके नेत्र खोलेंगे।  सहज सरल है अपनी भाषा,  रस की तो ये खान है। हम सब भारतीयों को,  निज भाषा पर अभिमान है। हिंदी हमारी मातृभाषा,  हिंदी हमारी शान है।  इसकी बदौलत विश्व में,  अपनी अलग पहचान है। --------------------------------- मनोज कुमार अनमोल 

गुरु आए जीवन में बनकर दिनकर

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गुरु आए जीवन में बनकर दिनकर ------------------------------------------ अज्ञानता के तिमिर को हरकर, गुरु आए जीवन में बनकर दिनकर। ज्ञान पोटली लाएं भर-भरकर, शिष्यों को फिर बांटा जमकर। गुरु तो ज्ञान के है रत्नाकर, कुन्दन बनाया हमें तपाकर। ------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

क्यों होती है लोगों को मुझसे जलन?

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क्यों होती है लोगों को मुझसे जलन? ------------------------------------------- क्यों होती है लोगों को मुझसे जलन? ना कहे हैं मैंने किसी को दुर्वचन। ना है किसी से मेरी अनबन,  मैं सदा रहता हूँ अपने में मगन। ---------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

मैं नारी हूँ

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     मैं नारी हूँ  -×-×-×-×-×-×-×-×-×-×-×-×- मैं वसुधा की नारी हूँ,  जन-जन मंगलकारी हूँ ..... मैं फूलों की क्यारी हूँ,  बच्चों की किलकारी हूँ।  गृहिणी, भगिनी, महतारी हूँ,  घर-घर की उजियारी हूँ।  मैं वसुधा की नारी हूँ,  जन-जन मंगलकारी हूँ .....  मैं प्रियतम की प्यारी हूँ,   प्रेम की पिचकारी हूँ।  कृति ब्रह्मा की न्यारी हूँ,  श्रद्धा की अधिकारी हूँ।  मैं वसुधा की नारी हूँ,  जन-जन मंगलकारी हूँ .....  मैं दुर्गा की अवतारी हूँ,   मैं सिंह गर्जना कारी हूँ। दुष्टों  पर मैं भारी हूूँ,   विघ्नों से ना हारी हूूँ।  मैं वसुधा की नारी हूँ,  जन-जन मंगलकारी हूँ .....  मैं अबला, ना बेचारी हूँ,  नर से भारी नारी हूँ।  भारत मां की दुलारी हूँ,   मैं सबकी हितकारी हूँ।  मैं वसुधा की नारी हूँ,  जन-जन मंगलकारी हूँ .....  -×-×-×-×-×-×-×-×-×-×--×-   मनोज कुमार अनमोल       रतापुर, रायबरेली          उत्...

जन्मदिन मुबारक हो भाई जान

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जन्मदिन मुबारक हो भाई जान ----------------------------------------------------- हर पल ओठों पर रहे मुस्कान, पूरे हो आपके सभी अरमान। हर जगह मिले आपको सम्मान, इसी दुआ के साथ जन्मदिन मुबारक हो भाई जान। ----------------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

प्रकृति सुषमा

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प्रकृति सुषमा  ----------------------------------------------------- प्रकृति की सुषमा अपार,  मन को हरती बार-बार।  जिधर भी दृष्टि जाती,  प्रकृति अपना सौन्दर्य दिखाती।  इस प्रकृति में खोकर कवि जन,  करते हैं नित नूतन वर्णन।  प्रात: होते ही दिनकर,  फैलाता है अपने रश्मि रूपी कर।  तृण पर पड़ी ओस की मुक्ता सी बूँदे, कलरव करते तरु नीड से पक्षी कूदे। पोखरों में सोता हुआ कमल,  खोलता है अपने पंखुड़ी रूपी नयन। कुछ तरुओं पर खग का कूजन, कुछ खग उड़ते मुक्त गगन। तरुओं और लताओं का मिलन,  अरण्यों में पशु करते विचरण।  प्रातः बहती त्रिविध पवन, छू लेती हर जन का मन।  आगन्तुक कुसुमों की सुगंध,  जब बहती है मन्द-मन्द। पराग पान हेतु लोभी भ्रमर,   तब पुष्पों पर करता विचरण।  झरनों का पर्वत से गिरना,  नदियों का कल-कल बहना।  चंचल तितली का पुष्पों पर उड़ना, इस प्रकृति की सुंदरता का क्या कहना। मैं अवलोक रहा हूँ बार-बार,  इस प्रकृति का रूप और श्रृंगार। पर मैं इस प्रकृति का कितना करूं बखान, क्योंकि यह प्रकृति है सौन्दर्य ...

आओ पेश करें हम मेहनत की मिसाल

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आओ पेश करें हम मेहनत की मिसाल ----------------------------------------------- आओ पेश करें हम मेहनत की मिसाल, प्रगति से मिलाएं अपने कदमताल। आज का काम कल पर मत टाल। सफलता न आए उसकी क्या मजाल? ---------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

उठो दोस्तों हो गई भोर

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उठो दोस्तों हो गई भोर ------------------------------- उठो दोस्तों हो गई भोर,  बादल घिर आए घनघोर। नाच रहे हैं देखो मोर, होकर भाव विभोर। जंगल में यह कैसा शोर,  क्या आ गया डायनासोर? ------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

ज़िन्दगी भर रहेगा मुझे ये मलाल

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जिंदगी भर रहेगा मुझे ये मलाल ------------------------------------------------ ज़िन्दगी भर रहेगा मुझे ये मलाल, कि अच्छा किया तूने मेरा इस्तेमाल। जो ले जा रही हो दिल इसे रखना संभाल, क्योंकि तुम ही बसी हो इसमें फ़िलहाल। -------------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

लिखी है मैंने पहली किताब

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लिखी है मैंने पहली किताब ------------------------------------------ लिखी है मैंने पहली किताब,  Like, Comment कर दो साब... अच्छी लगी या आपको खराब, Please देना जरूर जवाब... ------------------------------------------  मनोज कुमार अनमोल

हे दिलरुबा तू है कितनी हसीन

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है दिलरुबा तू है कितनी हसीन ------------------------------------------ हे दिलरुबा तू है कितनी हसीन, तू जन्नत की परी है या क्वीन। लोग कहते है कि तू है बड़ी शालीन, मेरे पास तू है मुझे न होता यक़ीन। ------------------------------------------ मनोज कुमार अनमोल

मेरी ज़िन्दगी है खुली किताब

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मेरी ज़िन्दगी है खुली किताब  ---------------------------------------- मेरी ज़िन्दगी है खुली किताब, जिसको पढ़ना है पढ़ लो साब।  हमने देखे थे क्या-क्या ख़्वाब? पर सब चकनाचूर हो गए जनाब। ---------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

प्यारा भारत देश हमारा

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प्यारा भारत देश हमारा -------------------------------------------- सबसे सुंदर सबसे न्यारा, प्यारा भारत देश हमारा। दिक् उत्तर में तुंग हिमालय, अरि से रक्षा करता है। फौलादी अपना सीना ताने, प्रतिपल वारों को सहता है। दक्षिण में हिंद महासागर, लहरा-लहरा कर बहता है। आसमान में नीरद बनकर, भू पर वर्षा करता है। यह राम, कृष्ण, गौतम की धरती, जहाँ गंगा, यमुना कल-कल बहती। विभिन्न तरह की यहाँ फसले उगती, जो जन-जन के उदरों को भरती। प्रेम, उदारता, दया भावना, यहाँ लोगों के दिल में बसती। ईर्ष्या, द्वेष, झूठ, कपट से, सदा आत्मा जिनकी डरती। यहाँ भिन्न-भिन्न है भाषा बोली, भिन्न-भिन्न है जाति, धर्म। इसके वासी भोले-भाले, जो करते हैं सत्कर्म। आओ देश का हम मान बढ़ाएं विश्व में इसको उच्च उठाएं। प्रेम से इसको शीश झुकाए, एक साथ सब मिलकर गाएं। सबसे सुंदर सबसे न्यारा, प्यारा भारत देश हमारा। --------------------------------------------       मनोज कुमार अनमोल

कमल

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कमल -------------------------------------- देखो राष्ट्रीय पुष्प कमल, सुंदर, कोमल इसके दल। पोखर है इसका आवास, इस पर लक्ष्मी जी का वास। भानु रश्मियां जब हैं पड़ती, कोमल पंखुड़ियाँ तब हैं खुलती। पवित्र, पुष्पराज है ये सुमन, जो मोहित करता सबका मन। ---------------------------------------- 🌟मनोज कुमार अनमोल🌟

कैसी लगी मेरी किताब?

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कैसी लगी मेरी किताब  ------------------------------ मैं जानने को हूँ बेताब,  कैसी लगी मेरी किताब? प्लीज़ देना जरूर ज़वाब। खराब है या लाज़वाब। ------------------------------ मनोज कुमार अनमोल 

कहाँ गई गौरैया प्यारी?

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कहाँ गई गौरैया प्यारी? -------------------------------------- कहाँ गई गौरैया प्यारी? अब ना दिखती है बेचारी।  सूना आँगन सूनी अटारी,  बाग-बगीचे और फुलवारी।  ध्वनि थी जिसकी एकदम न्यारी,  चुगने आती बारी-बारी।  थी नन्हीं वह जीव धारी,   संकटग्रस्त हुई बेचारी।  आओ बने हम मंगलकारी,  यह संदेश जनहित में जारी। -----------------------------------------  🌟मनोज कुमार अनमोल🌟 

कभी सुनना तुम मेरे दिल की आवाज़

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कभी सुनना तुम मेरे दिल की आवाज़ ----------------------------------------------------- कभी सुनना तुम मेरे दिल की आवाज़, बस यही कहेगा कि तुम ही हो मेरी मुमताज़।  छुपा रखा है वर्षों से दिल में ये राज़,  पर डर लगता है बोलने में ये अल्फाज़। ----------------------------------------------------- 🌟मनोज कुमार अनमोल 🌟

हे प्रिये आपसे ये मेरा वादा है

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हे प्रिये आपसे ये मेरा वादा है -------------------------------------------- हे प्रिये आपसे ये मेरा वादा है,  हर घड़ी साथ निभाने का इरादा है। भरोसा ख़ुद से भी तुझ पर ज़्यादा है,  हे चन्द्रमुखी सुन्दर तेरी ये मर्यादा है। -------------------------------------------- 🌷मनोज कुमार अनमोल🌷

दुआ है आपको ईश्वर रखें कुशल

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दुआ है आपको ईश्वर रखें कुशल ----------------------------------------------- दुआ है आपको ईश्वर रखें कुशल,  किसी भी कार्य में आप न हो असफल। ख़ुश रहे आपका मन प्रतिपल, बाल न बाँका कर सके रिपु दल। टूटने न पाए आपका मनोबल, निर्बल न हो आपका आत्मबल। ----------------------------------------------- 🌟मनोज कुमार अनमोल 🌟