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Showing posts from November, 2018

88/7 दे दो...

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प्यारे दोस्तों यह एक गणितीय हास्य लघु कहानी है, जो कि मनोरंजन के उद्देश्य से लिखी गई है......            बात उन दिनों की है, जब गांव में टेंट हाउस नहीं हुआ करते थे। मेरी ननद सलोनी की शादी गांव में थी। शादी के एक दिन पहले मेरा सबसे छोटा देवर वैभव जो कि हाई स्कूल में पढ़ता है, काफी शरारती एवं होशियार है, उसको मेरे ससुर जी ने आस-पास के घरों से जरूरत का सामान जैसे- चद्दर, दरी, चारपाई, बर्तन इत्यादि सामान एकत्र करने के लिए कहा। वह जिसके घर में जाता और कहता- चद्दर दे दो, दरी दे दो, भगोना दे दो, और 88/7 दे दो। लोग उसके द्वारा मांगी गई सब सामान तो दे देते, लेकिन 88/7 उनकी समझ में नहीं आता कि ये क्या है? वे लोग उससे पूछते कि ये 88/7 क्या है? लेकिन वो मुस्कुरा देता और कहता बूझो तो जाने। कुछ पड़ोस की औरतों ने उसकी 88 /7 की मांग को घर आकर मुझसे बताया तो मैंने उसको बुलाकर पूछा कि वैभव ये तू सबके घर में 88/7 क्या मांग रहा है?  तो उसने मुझसे कहा कि आप ही बता दें तो जाने..... तो मैंने उससे कहा... मैं क्या बताऊं यह कौन सी बला है? तब उसने मुझे बताया कि यह चारपाई अर्थात खटिया है। क्योंकि गणित में 4 पाई

मैं राह देखती खड़ी द्वार

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मैं राह देखती खड़ी द्वार, प्रियतम आ जाओ एक बार..... सुन लो दिल की करुण पुकार, कब होगा तेरा दीदार। कब होंगी फिर आंखें चार, जरा बताना मुझको यार। मैं राह देखती खड़ी द्वार, प्रियतम आ जाओ एक बार..... अंखियां दुखती पंथ निहार, अश्रु निकलते बारम्बार। निशिि-वासर मैं करूं इंतजार, तन्हाई डालेगी मार। मैं राह देखती खड़ी द्वार, प्रियतम आ जाओ एक बार..... तुम बिन फीके सब त्योहार, रूखा लगता है आहार। तुम्हें बुलाए मेरा प्यार, पहना दे बांहों का हार। मैं राह देखती खड़ी द्वार, प्रियतम आ जाओ एक बार.....          ****** मनोज कुमार 'अनमोल'    रतापुर, रायबरेली       उत्तर प्रदेश

प्रियतम तेरी याद सताती

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मधुर मिलन की स्मृतियां जब नैनों में है छाती, प्रियतम तेरी याद सताती, प्रियतम तेरी याद सताती... वो उपवन में तेरा आना, नयन दृष्टि का टकराना, मृदुल मनोरम अंगुलियों का, अनुलेपन सा सहलाना, वो अधरों का मेरा चुंबन, बाहुपाश का आलिंगन, मृदु यादें तड़पाती, प्रियतम तेरी याद सताती, प्रियतम तेरी याद सताती... मधुर मिलन की स्मृतियां, जब नैनों में है छाती, प्रियतम तेरी याद सताती, प्रियतम तेरी याद सताती... यौवन रूपी सुमन खिला है, प्रियतम भंवरे आ जाओ, प्रेम का संगीत सुनाकर, रस मेरा तुम पी जाओ, तुम बिन पृथक न जी पाएंगे, रैन बहुत तड़पाती, प्रियतम तेरी याद सताती, प्रियतम तेरी याद सताती...          ****** मनोज कुमार 'अनमोल'

भगवान जी को शुगर व्यंग्य

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       एक दिन भगवान शंकर मेरे सपने में आए                 मुझे देख कर मुस्कुराए।      बोले बेटा एक बात कहता हूं, ध्यान से सुनना,    मेरी इस फरियाद को, मेरे अन्य भक्तों से भी कहना। कहना कि अब लोग, प्रसाद में मीठी चीजे ना चढ़ाया करें,       हो सके तो नमकीन का भोग लगाया करें।      मैंने कहा हे प्रभु! यह आप क्या कह रहे हैं?    ईश्वर होकर भी आप मीठी चीजों से डर रहे हैं,       तब उन्होंने कहा कि तुम मनुष्य सोचते होगे,        कि हम देवता अमर हैं, मर नहीं सकते हैं।          लेकिन बीमारी से तो जकड़ सकते हैं।                   मीठी चीजें खा-खाकर,         सभी देवी-देवताओं को शुगर हो गया है, और हम लोगों का अस्तित्व अब खतरे में पड़ गया है।    अब हम लोग मीठी चीजों से परहेज करने लगे हैं, और मंदिर जाने वाले अपने भक्तों से विशेष आग्रह करने लगे हैं, कि जब भी वह मंदिर में जाएं, नमकीन और कच्चे करेले का भोग लगाएं,      गंगाजल की जगह पर करेले का जूस चढ़ाएं, और हम सब देवी-देवताओं को शुगर से मुक्त कराएं ।                            ******               - मनोज कुमार 'अनमोल'

सरस्वती वंदना

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            हे मां सरस्वती, वर दो, वर दो,      तम से भरे पथ को मेरे, आलोकित कर दो।      चित्त कलुषता दूर करो, मेधा में प्रवीण करो,      जो टूट रहे हैं स्वर मेरे, उनमें नव गति भर दो।             हे मां सरस्वती, वर दो, वर दो,      तम से भरे पथ को मेरे, आलोकित कर दो। दुर्गुण पापों को दूर करो, जो लक्ष्य चुने वह पूर्ण करो, प्रगति मार्ग पर बढ़ता जाऊं, उत्साह हृदय में भर दो।              हे मां सरस्वती, वर दो, वर दो,       तम से भरे पथ को मेरे, आलोकित कर दो।     दंभ, लोलुपता दूर करो, पथ कांटों को फूल करो,        सो रहे भाग्य को मैया मेरे, तुम जागृत कर दो।              हे मां सरस्वती, वर दो, वर दो,        तम से भरे पथ को मेरे, आलोकित कर दो।                         *********                   मनोज कुमार 'अनमोल'              रतापुर,  रायबरेली (उत्तर प्रदेश)