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Showing posts from July, 2026

गुरु आए जीवन में बनकर दिनकर

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गुरु आए जीवन में बनकर दिनकर ------------------------------------------ अज्ञानता के तिमिर को हरकर, गुरु आए जीवन में बनकर दिनकर। ज्ञान पोटली लाएं भर-भरकर, शिष्यों को फिर बांटा जमकर। गुरु तो ज्ञान के है रत्नाकर, कुन्दन बनाया हमें तपाकर। ------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

क्यों होती है लोगों को मुझसे जलन?

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क्यों होती है लोगों को मुझसे जलन? ------------------------------------------- क्यों होती है लोगों को मुझसे जलन? ना कहे हैं मैंने किसी को दुर्वचन। ना है किसी से मेरी अनबन,  मैं सदा रहता हूँ अपने में मगन। ---------------------------------------------- मनोज कुमार अनमोल

मैं नारी हूँ

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     मैं नारी हूँ  -×-×-×-×-×-×-×-×-×-×-×-×- मैं वसुधा की नारी हूँ,  जन-जन मंगलकारी हूँ ..... मैं फूलों की क्यारी हूँ,  बच्चों की किलकारी हूँ।  गृहिणी, भगिनी, महतारी हूँ,  घर-घर की उजियारी हूँ।  मैं वसुधा की नारी हूँ,  जन-जन मंगलकारी हूँ .....  मैं प्रियतम की प्यारी हूँ,   प्रेम की पिचकारी हूँ।  कृति ब्रह्मा की न्यारी हूँ,  श्रद्धा की अधिकारी हूँ।  मैं वसुधा की नारी हूँ,  जन-जन मंगलकारी हूँ .....  मैं दुर्गा की अवतारी हूँ,   मैं सिंह गर्जना कारी हूँ। दुष्टों  पर मैं भारी हूूँ,   विघ्नों से ना हारी हूूँ।  मैं वसुधा की नारी हूँ,  जन-जन मंगलकारी हूँ .....  मैं अबला, ना बेचारी हूँ,  नर से भारी नारी हूँ।  भारत मां की दुलारी हूँ,   मैं सबकी हितकारी हूँ।  मैं वसुधा की नारी हूँ,  जन-जन मंगलकारी हूँ .....  -×-×-×-×-×-×-×-×-×-×--×-   मनोज कुमार अनमोल       रतापुर, रायबरेली          उत्...