बुझ ना जाए तेरी यादों का चिराग़

बुझ ना जाए तेरी यादों का चिराग़
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बुझ ना जाए तेरी यादों का चिराग़,
ख़ामोश ना हो जाएं ये मेरे अल्फाज़।
विरह की वेदना सताती है सरताज,
अविलम्ब आना तुम देना आवाज़।
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मनोज कुमार अनमोल 

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