मुझे थी जिसकी तलाश

मुझे थी जिसकी तलाश
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मुझे थी जिसकी तलाश...
आज गटर में मिली उसकी लाश,
सुना था बड़ा हो गया था अय्याश,
अपने हाथों से किया अपना विनाश,
ख़ामोश है धरती और आकाश,
मन मेरा भी है बड़ा हताश,
बेवफाई से पहले समझा देती उसे काश...
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मनोज कुमार अनमोल 

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